टूटा है अगर दिल तो इसे रोने दो,
तमाशा ये हरेक रोज़ है ,इसे होने दो !!!
साँसे नहीं आती अब जन्नत की हवा में,
जहन्नुम गर होता हैं समाँ ,इसे होने दो !!
तारे जमा कर रखे हैं सियाह लिहाफ में,
सुबह में देर है तो ज़रा,उनको पिरोने दो !!!
छिपते हो शब्-ए-ग़म की दरारों में 'अब्तर',
नज़र आ जाओगे तुम भी ,सुबह होने दो !!
तमाशा ये हरेक रोज़ है ,इसे होने दो !!!
साँसे नहीं आती अब जन्नत की हवा में,
जहन्नुम गर होता हैं समाँ ,इसे होने दो !!
तारे जमा कर रखे हैं सियाह लिहाफ में,
सुबह में देर है तो ज़रा,उनको पिरोने दो !!!
छिपते हो शब्-ए-ग़म की दरारों में 'अब्तर',
नज़र आ जाओगे तुम भी ,सुबह होने दो !!

